Article 370 और 35A क्या है in hindi

Indian article 370 and 35A


भारत के संविधान का अनुच्छेद 370 जम्मू और कश्मीर राज्य को एक विशेष दर्जा देता है, जो भारतीय संघ का एक निर्वाचक राज्य है।
संविधान के भाग XXI में अनुच्छेद का मसौदा तैयार किया गया है। भारत के संविधान के सभी प्रावधान जम्मू और कश्मीर राज्य पर लागू नहीं होते हैं। साथ ही, जम्मू और कश्मीर एकमात्र भारतीय राज्य है जिसका अपना अलग राज्य संविधान है यानी जम्मू और कश्मीर का संविधान।
यह अनुच्छेद एक अस्थायी प्रावधान के रूप में था, लेकिन स्थायी हो गया जब राज्य की विधानसभा ने 25 जनवरी, 1957 को अनुच्छेद 370 के निरस्त / संशोधन की सिफारिश किए बिना खुद को भंग कर दिया।
तदनुसार, भारतीय संसद को राज्य में किसी भी कानून को लागू करने के लिए राज्य सरकार के सहयोग की आवश्यकता होती है, जबकि तीन विषयों को छोड़कर भारत के डोमिनियन में प्रवेश के समय आत्मसमर्पण किया जाता है। ये रक्षा, विदेश मामले और संचार हैं।
यदि राज्य की संविधान सभा की सिफारिश पर राष्ट्रपति घोषणा करते हैं तो अनुच्छेद 370 का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।

संघ के साथ जम्मू और कश्मीर राज्य का वर्तमान संबंध इस प्रकार है:

. जम्मू-कश्मीर भारतीय संघ का निर्वाचक राज्य है, लेकिन इसकी विधायिका की सहमति के बिना इसका नाम, क्षेत्र या सीमा में बदलाव नहीं किए जा सकते।

-. भारत के संविधान का भाग VI (राज्य सरकारों के संदर्भ में) जम्मू-कश्मीर राज्य पर लागू नहीं होता क्योंकि इसका अपना संविधान है और प्रशासन उस संविधान के अनुसार कार्य करता है।-. कानून बनाने की अवशिष्ट शक्ति कुछ मामलों को छोड़कर राज्य से संबंधित है। इसके अतिरिक्त, राज्य में निवारक निरोध के कानून बनाने की शक्ति राज्य विधायिका से संबंधित है। दूसरे शब्दों में, संसद द्वारा बनाए गए निवारक निरोध कानून जम्मू-कश्मीर राज्य पर लागू नहीं होते हैं।-. मौलिक अधिकार राज्य के लिए लागू होते हैं, लेकिन अंतर यह है कि अन्यथा इसके विपरीत, राज्य में संपत्ति के मौलिक अधिकार की गारंटी राज्य में ही है।-. राज्य के लिए प्रत्यक्ष सिद्धांत और मौलिक कर्तव्य लागू नहीं होते हैं। यदि आंतरिक गड़बड़ी के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया जाता है, तो राज्य सरकार के सहयोग के अलावा यह राज्य में अप्रभावी होगा। साथ ही, राष्ट्रपति को राज्य में वित्तीय आपातकाल घोषित करने का कोई अधिकार नहीं है।-. राष्ट्रपति किसी भी आधार पर, यहां तक ​​कि उसके द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन में कार्य करने में विफलता के आधार पर राज्य के संविधान को निलंबित नहीं कर सकते।.- संविधान की पांचवीं और छठी अनुसूची, अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों और जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन और नियंत्रण से संबंधित राज्य के लिए लागू नहीं होती है।-. भारत के अन्य राज्यों के उच्च न्यायालयों के विपरीत जम्मू-कश्मीर का उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के अलावा किसी अन्य कारण से याचिका जारी नहीं कर सकता है।-. पाकिस्तान में प्रवासियों के नागरिक अधिकारों से वंचित करने के बारे में संविधान के भाग II के प्रावधान जम्मू और कश्मीर राज्य के स्थायी निवासियों पर लागू नहीं होते हैं।
इस अनुच्छेद के कारण, भारतीय इस भूमि पर जाने के लिए अलग-थलग महसूस करते हैं जो प्रत्येक नागरिक से संबंधित है।
भारत के बाहर रहने वाले नागरिक जम्मू-कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते।
जम्मू-कश्मीर की कोई भी महिला नागरिक यदि किसी बाहरी व्यक्ति से विवाह करती है तो उससे उसकी वास्तविक पैतृक जमीन छीन ली जाती है।

धारा 370 के परिणाम :

क्या होगा यदि धारा 370 को निरस्त कर दिया जाता है?

अनुच्छेद 370 को निरस्त करना, जिसे एक अस्थायी प्रावधान के रूप में संविधान में निर्धारित किया गया था, तब से एक बहस का मुद्दा रहा है।
यदि सरकार अपनी पूरी क्षमता में चाहे तो धारा 370 को निरस्त कर सकती है, लेकिन इस तरह निरस्त करने से गंभीर परिणाम हो सकते हैं:

  1. यदि धारा 370 को रद्द कर दिया जाता है, तो ऐसी संभावना हो सकती है कि पाकिस्तान और चीन जैसी विदेशी शक्तियां सरकार के खिलाफ विरोध शुरू करने के लिए कश्मीर के लोगों को उकसाने की कोशिश करें।
  2. इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं क्योंकि इससे कश्मीर में उग्रता बढ़ेगी, क्योंकि लोग इसे उन पर दबाव के कार्य के रूप में मानेंगे।
  3. भारत की एक अनुकरणीय लोकतंत्र होने की छवि एक गंभीर रूप ले लेगी और समानता वाले देशों जैसे कि फिलिस्तीन पर बलपूर्वक कब्जा करने वाले देशइजराइल के साथ की जाएगी।

अनुच्छेद 35A क्या है? 

अनुच्छेद 35A संविधान में शामिल प्रावधान है जो जम्मू और कश्मीर विधानमंडल को यह अधिकार प्रदान करता है कि वह यह तय करे कि जम्मू और कश्मीर का स्थायी निवासी कौन है और किसे सार्वजनिक क्षेत्र की नौकरियों में विशेष आरक्षण दिया जायेगा, किसे संपत्ति खरीदने का अधिकार होगा, किसे जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनाव में वोट डालने का अधिकार होगा, छात्रवृत्ति तथा अन्य सार्वजनिक सहायता और किसे सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों का लाभ मिलेगा. आर्टिकल 35A में यह प्रावधान है कि यदि राज्य सरकार किसी कानून को अपने हिसाब से बदलती है तो उसे किसी भी कोर्ट में चुनौती नही दी जा सकती है.
अनुच्छेद 35A, जम्मू-कश्मीर को राज्य के रूप में विशेष अधिकार देता है. इसके तहत दिए गए अधिकार ‘स्थाई निवासियों’ से जुड़े हुए हैं. इसका मतलब है कि j& K राज्य सरकार को ये अधिकार है कि वो आजादी के वक्त दूसरी जगहों से आए शरणार्थियों और अन्य भारतीय नागरिकों को जम्मू-कश्मीर में किस तरह की सहूलियतें दे अथवा नहीं दे.

अनुच्छेद  35A भारतीय संविधान में कब जुड़ा? 

अनुच्छेद 35A,14 मई 1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने एक आदेश पारित किया था. इस आदेश के जरिए भारत के संविधान में एक नया अनुच्छेद 35A जोड़ दिया गया.

अनुच्छेद 35A में मुख्य प्रावधान क्या हैं? (Provisions under Article 35A)

यह आर्टिकल किसी गैर कश्मीरी व्यक्ति को कश्मीर में जमीन खरीदने से रोकता है.
– भारत के किसी अन्य राज्य का निवासी जम्मू & कश्मीर का स्थायी निवासी नही बन सकता है और इसी कारण वहां वोट नही डाल सकता है.
– अगर जम्मू & कश्मीर की कोई लड़की किसी बाहर के लड़के से शादी कर लेती है तो उसके सारे अधिकार खत्म हो जाते हैं. साथ ही उसके बच्चों के अधिकार भी खत्म हो जाते हैं.
– यह आर्टिकल भारत के नागरिकों के साथ भेदभाव करता है क्योंकि इस आर्टिकल के लागू होने के कारण भारत के लोगों को जम्मू-कश्मीर के स्थायी निवासी प्रमाणपत्र से वंचित कर दिया जबकि पाकिस्तान से आये घुसपैठियों को नागरिकता दे दी गयी. अभी हाल ही में कश्मीर में म्यांमार से आये रोहिंग्या मुसलमानों को भी कश्मीर में बसने की इज़ाज़त दे दी गयी है.
वर्तमान में इसे हटाने की मांग क्यों हो रही है?
– इसे हटाने के लिए पहली दलील यह है कि इसे संसद के जरिए लागू नहीं करवाया गया था.
– देश के विभाजन के वक्त बड़ी तादाद में पाकिस्तान से शरणार्थी भारत आए. इनमें लाखों की तादाद में शरणार्थी जम्मू-कश्मीर राज्य में भी रह रहे हैं और उन्हें वहां की नागरिकता दे दी गयी है.
– जम्मू & कश्मीर सरकार ने अनुच्छेद 35A के जरिए इन सभी भारतीय नागरिकों को जम्मू-कश्मीर के स्थायी निवासी प्रमाणपत्र से वंचित कर दिया. इन वंचितों में 80 फीसद लोग पिछड़े और दलित हिंदू समुदाय से हैं.
– जम्मू & कश्मीर में विवाह कर बसने वाली महिलाओं और अन्य भारतीय नागरिकों के साथ भी जम्मू & कश्मीर सरकार आर्टिकल 35A की आड़ लेकर भेदभाव करती है.
वर्तमान स्थिति क्या है?
लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में शिकायत की थी कि आर्टिकल 35A के कारण संविधान प्रदत्त उनके मूल अधिकार जम्मू-कश्मीर राज्य में छीन लिए गए हैं, लिहाजा राष्ट्रपति के आदेश से लागू इस धारा को केंद्र सरकार फौरन रद्द करे.
ऊपर दिए गए तर्कों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि जम्मू & कश्मीर को अनुच्छेद 35A और अनुच्छेद 370 के कारण बहुत से विशेष अधिकार मिले हुए हैं जिससे ऐसा लगता है कि भारत के अन्दर एक और भारत मौजूद है जिसका अपना अलग संविधान है, नागरिकता है और अपना राष्ट्रीय झंडा है. ऐसी स्थिति भारत की एकता और अखंडता के लिए बहुत बड़ा खतरा है इसलिए भारत सरकार को इस मुद्दे को बिना किसी देरी के सुलझाना चाहिए.

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